शिखर संवाद ब्यूरो-
Badaun News : जब रक्षक ही मौन हो जाएं और सिस्टम अपराधियों की ढाल बन जाए, तो न्याय दम तोड़ देता है। बदायूं के दातागंज क्षेत्र से आई एक झकझोर देने वाली तस्वीर ने प्रशासन पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं। एक बेबस भाई, ओम सिंह, अपने मृतक भाई प्रकाश चंद्र की अस्थियों का कलश सीने से लगाए डीएम और एसएसपी दफ्तर की चौखट पर न्याय मांग रहा है—एक ऐसी न्याय की गुहार, जो शायद जीते जी उसके भाई को मिल जाती तो उसकी जान बच सकती थी।
जमीन के फर्जी बैनामे से शुरू हुआ यह विवाद
इस त्रासदी की शुरुआत जमीन के उस टुकड़े से हुई, जिसे अपनों ने ही हड़प लिया। आरोप है कि प्रकाश चंद्र की जमीन काफर्जी बैनामा उनके सगे भाई की पत्नी ने एक बाहरी व्यक्ति के नाम कर दिया। जब सच सामने आया, तो पीड़ित ने एफआईआर दर्ज कराई। लेकिन, न्याय की चक्की इतनी धीमी चली कि आठ महीने बीत जाने के बाद भी पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि पुलिस की मिलीभगत और राजनीतिक रसूख के कारण आरोपी खुलेआम घूमते रहे और प्रकाश चंद्र पर समझौता करने का दबाव डालते रहे। यह मानसिक उत्पीड़न इस कदर बढ़ा कि प्रकाश चंद्र का दिल इसे झेल नहीं पाया और हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई।
डीएम एसएसपी ने दिया ठोस कार्रवाई का आदेश
हैरानी की बात यह है कि दबंगों के हौसले इतने बुलंद थे कि उन्होंने रजिस्ट्रार ऑफिस के भीतर प्रकाश चंद्र का गला दबाकर अपहरण करने की कोशिश की। पुलिस ने आरोपियों को पकड़ा तो सही, लेकिन कथित तौर पर राजनीतिक दबाव के चलते उन्हें छोड़ दिया गया। आज, ओम सिंह अपने भाई की राख लेकर अधिकारियों से पूछ रहे हैं—क्या इस तंत्र में गरीब की जान की कोई कीमत नहीं? एसएसपी अंकिता शर्मा और डीएम ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अब ठोस कार्रवाई का आश्वासन दिया है। अब देखना यह है कि क्या प्रकाश चंद्र की अस्थियों को विसर्जन से पहले न्याय मिल पाएगा?

0 टिप्पणियाँ